Thursday, October 10, 2013
Tuesday, May 7, 2013
प्रिय मैट्रिक के विद्यार्थियों परीक्षा परिणाम आ चुका है । इसके लिए
झारखण्ड एकेडमिक कौंसिल के वेब पर www.jharesults.nic.in. देखें । या फिर दूसरी तरकीब के रूप में
इंडिया रिजल्ट डॉट कॉम
( www.indiareuslts.com) पर जाएँ ।
झारखण्ड एकेडमिक कौंसिल के साईट पर जन्म तिथि , रोल कोड, और रोल नंबर माँगा जाता है । जबकि इंडिया रिजल्ट्स डॉट कॉम पर केवल रोल कोड और रोल नंबर माँगा जाता है ।
वैसे विद्यार्थी , जो रोल कोड और रोल नंबर ही याद रख पायें हैं , उनके लिए इंडिया रिजल्ट्स डॉट कॉम ही कामयाब होगा । इस साईट पर झारखण्ड रिजल्ट लिखा हुआ एक आप्शन स्क्रीन के बाएं साईट पर ब्लिंक करेगा या फिर कभी- कभी स्क्रॉल वे में चलता रहेगा ।
सभी शुभकामनाओं के साथ ! www. indiaressults.com
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Friday, June 8, 2012
Wednesday, June 6, 2012
Monday, June 4, 2012
Monday, February 6, 2012
तपोवन पहाड़ी स्थित प्राकृतिक ऊर्जा का समुचित लाभ

देवनगरी देवघर से महज सात किलोमीटर दूर तपोवन पहाड़ी स्थित प्राकृतिक ऊर्जा का समुचित लाभ लेने के लिए केंद्रीय उर्जा व नवीनीकरण मंत्रालय पहल शुरू कर दी है | इसमें राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की और से धन निवेश किया जा रहा है | सूर्य की रौशनी से प्राप्त ऊर्जा को एकत्रित करने के लिए भारी संख्या में सोलर प्लेट लगाया जा रहा है | सोलर प्लेट लगने के बाद यहाँ से पूरे देवघर को सोलर इलेक्ट्रिक से जोड़ दिया जायेगा | .....................
Monday, August 8, 2011
बिहार के श्रम मंत्री जनार्दन सिग्रीवाल से देवघर उपायुक्त मस्त राम मीणा ने धक्का - मुक्की और दुर्व्यवहार भी किया |
सावन के अंतिम सोमवारी में बिहार के श्रम मंत्री जनार्दन सिग्रीवाल से देवघर उपायुक्त मस्त राम मीणा ने धक्का - मुक्की ही नही दुर्व्यवहार भी किया | यह घटना बाबा बैधनाथ मंदिर में सुबह के सरकारी पूजा में वी आइ पी पास द्वारा पूजा अर्चना को प्रवेश करने के दौरान घटी | मालूम हो कि श्री सिग्रीवाल जिला प्रशासन द्वारा मिले चार पास को लेकर बाबा बैधनाथ मंदिर में पूजा अर्चना हेतु कतार में लग गए ,मंत्री होने के कारण उनके पीछे करीब १६ आदमी कतार में खड़े हो गये | इतने में देवघर डी सी आकर वी आई पी पास चेक करते हुए उन्हें धक्का मारकर कतार से बाहर करने लगे | लगे हाथ डी सी के साथ रहने वाले पुलिस कर्मियों ने भी अपना हाथ साफ कर लिया | इस घटना में बिहार के मंत्री श्री सिग्रीवाल के साथ देवघर डी सी मस्तराम मीणा के बीच वाकयुद शुरू हो गया | और बात आगे बदने लगी | मदिर में रहने वाले पंडों ने बीच बचाव करते हुए मामले को दबाया | अपने साथ हुए घटना के बाद बिहार के मंत्री ने कहा कि मानसिक रूप से बीमार टाइप के पदाधिकारी को देवघर में लाखों श्रदालू के लिए डयूटी में नहीं लगाना चाहिए | इस घटना की शिकायत मै बिहार के मुख्यमंत्री और झारखण्ड के मुख्यमंत्री से करूँगा |
रही बात वी आइ पी पास और सुबह सरकारी पूजा में सख्ती बरतने की | देवघर डी सी खुद ही वी आइ पी पास प्रक्रिया का मजाक उड़ाते है | इनकी पत्नी के पास कौन सा वी आइ पी पास होता है , जो प्रतिदिन सरकारी पूजा के दौरान पूजा करने के लिए कतार में लग जाते है , और अपने साथ कुछ चाटुकार को भी घुसा डालते हैं | इस वक्त कहाँ जाती है डी सी मस्त राम मीणा का ईमानदारी और मुस्तैदी | कहाँ खो जाता है उनका पारदर्शिता ? देवघर डी सी को अगर वी आइ पी पास का मतलब इतना ही समझ में आता है अपने पत्नी की तरह सबके लिए सुविधा देना चाहिए या फिर पहले खुद सुधरे फिर दुसरे को सुधरने में लगें |
बिहार के श्रम मंत्री के साथ धक्का - मुक्की और दुर्व्यहार करने वाले डी सी कितना प्रोटोकॉल को मानते है ,यह भी एक सवाल है | अगर झारखण्ड की कोई मंत्री बाबा मंदिर में वी आइ पी पास द्वारा या अन्य तरीके से पूजा करने आयेंगे तो देवघर डी सी भींगी बिल्ली की तरह डरे हुए चुपचाप आराम से पूजा कराएँगे |यह जानकारी केवल आपके जानने के लिए है , अगर देवघर डी सी के करतूत के बारे में जानना है तो उनके घर राजस्थान से लेकर जहाँ - जहाँ वे पदस्थापित थे , वहां उनकी क्या गतिविधि रही , उसके बारे में जाने | यह ऊपर से जितना अपने को निष्ठांवान दर्शाता है , उतना ही अन्दर से काला है | संक्षेप में बता दें , यह पदाधिकारी देवघर में अपने पैरवी के बल पर तीन वर्ष बीता चुके हैं | इस बार भी ट्रान्सफर होने के बाद पैरवी के बल पर देवघर में शावन में बने रहे | उसके पीछे सावन में मिलने वाली राशी का बंदरबांट भी हो सकता है |
कहना कठिन है , फिर भी यह जानकार अफसोस होगा कि मस्त राम मीणा पर साहेबगंज और पाकुड़ जिला में भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप है और इस पर अनुसन्धान चल रहा है | अपनी चमड़ी बचने के लिए समाचार प्रकाशित करने वाले अखबार के खिलाफ प्रेस इनफोर्मेसन ब्यूरो तक गए | लेकिन अनुसन्धान की प्रक्रिया पूरा होने के साथ ही अब करीब - करीब मस्त राम मीणा दोषी साबित होने जा रहे हैं | अगर वे दोषी साबित हो गए तो उन्हें जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता |
रही बात वी आइ पी पास और सुबह सरकारी पूजा में सख्ती बरतने की | देवघर डी सी खुद ही वी आइ पी पास प्रक्रिया का मजाक उड़ाते है | इनकी पत्नी के पास कौन सा वी आइ पी पास होता है , जो प्रतिदिन सरकारी पूजा के दौरान पूजा करने के लिए कतार में लग जाते है , और अपने साथ कुछ चाटुकार को भी घुसा डालते हैं | इस वक्त कहाँ जाती है डी सी मस्त राम मीणा का ईमानदारी और मुस्तैदी | कहाँ खो जाता है उनका पारदर्शिता ? देवघर डी सी को अगर वी आइ पी पास का मतलब इतना ही समझ में आता है अपने पत्नी की तरह सबके लिए सुविधा देना चाहिए या फिर पहले खुद सुधरे फिर दुसरे को सुधरने में लगें |
बिहार के श्रम मंत्री के साथ धक्का - मुक्की और दुर्व्यहार करने वाले डी सी कितना प्रोटोकॉल को मानते है ,यह भी एक सवाल है | अगर झारखण्ड की कोई मंत्री बाबा मंदिर में वी आइ पी पास द्वारा या अन्य तरीके से पूजा करने आयेंगे तो देवघर डी सी भींगी बिल्ली की तरह डरे हुए चुपचाप आराम से पूजा कराएँगे |यह जानकारी केवल आपके जानने के लिए है , अगर देवघर डी सी के करतूत के बारे में जानना है तो उनके घर राजस्थान से लेकर जहाँ - जहाँ वे पदस्थापित थे , वहां उनकी क्या गतिविधि रही , उसके बारे में जाने | यह ऊपर से जितना अपने को निष्ठांवान दर्शाता है , उतना ही अन्दर से काला है | संक्षेप में बता दें , यह पदाधिकारी देवघर में अपने पैरवी के बल पर तीन वर्ष बीता चुके हैं | इस बार भी ट्रान्सफर होने के बाद पैरवी के बल पर देवघर में शावन में बने रहे | उसके पीछे सावन में मिलने वाली राशी का बंदरबांट भी हो सकता है |
कहना कठिन है , फिर भी यह जानकार अफसोस होगा कि मस्त राम मीणा पर साहेबगंज और पाकुड़ जिला में भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप है और इस पर अनुसन्धान चल रहा है | अपनी चमड़ी बचने के लिए समाचार प्रकाशित करने वाले अखबार के खिलाफ प्रेस इनफोर्मेसन ब्यूरो तक गए | लेकिन अनुसन्धान की प्रक्रिया पूरा होने के साथ ही अब करीब - करीब मस्त राम मीणा दोषी साबित होने जा रहे हैं | अगर वे दोषी साबित हो गए तो उन्हें जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता |
Saturday, August 6, 2011
यात्रीगण कृपया ध्यान दें ,

यात्रीगण कृपया ध्यान दें , जी हाँ ध्यान से पढिये इसे | यह आपके लिए और हम सबके लिए जानना जरुरी है | आप झारखण्ड राज्य के धार्मिक स्थल देवघर आतें हैं और रेलवे द्वारा चलाये जा रहे रेलगाड़ी की सवारी भी करतें हैं | इसमें कोई दो राय नहीं है की आप रेलगाड़ी में सवार होने के पूर्व टिकट काउंटर और प्लेटफार्म के प्रवेश द्वार पर होने वाले व्यवहार से दो - चार नहीं होते होंगे | यह परेशानी सावन माह में होती है , क्योंकि लाखो शिव भक्त यहाँ आस्था व्यक्त करने के लिए आतें हैं और कांवरिया वस्त्रों वाले लोगों का कारंवा नज़र आता है | मानो कोई महासंग्राम में सभी निकले हों | लेकिन यहाँ एक खास मकसद होता है , बाबा बैधनाथ पर जलार्पण कर अपनी आस्था व्यक्त करना और फिर अपने घर को वापस जाना | केशरिया रंगों से लबरेज वस्त्रों में सजे कांवरियों की भीड़ को देखकर रेलवे को ऐसा मालूम पड़ने लगता है , जैसे भी हो रेलवे की दुकानदारी में ज्यादा से ज्यादा आमदनी को शामिल कर लो और ऐसा करतें भी है | कांवरियों को अपना मुल्ला मन सीधे किउल और पटना तक का टिकट कटाने को बाध्य करतें है , वो भी टिकट नहीं है का बहाना बनाकर | जबकि स्थानियों लोगों द्वारा टिकट काउंटर पर बैध नाथ धाम और जसीडीह से नजदीकी स्टेशन का टिकट मांगने पर टिकट काउंटर पर प्रतिनियुक्त प्रतिनिधि टिकट देने से सीधे तौर पर नकार देते हैं | जिस कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और उन्हें मजबूर होकर खीच - खीच करना पड़ता है | रेलवे स्टेशन के मेनेजर को भी इससे दो -चार होना पड़ता है और फिर स्थानीय लोगों को उनके नजदीकी गंतव्य तक का टिकट उपलब्ध कराना पड़ता है | सही मायनो में सावन माह मुसीबतों का सफर हो जाता है ,सावन माह में बैधनाथ धाम और जसीडीह से मधुपुर और झाझा दिशाओं की और जाने वाली रेलगाड़ियों में सफर करने के लिए एक चुनौती का सामना करना पड़ता है | ऐसी स्थिति में नजदीकी गंतव्य तक जाने वाले लोगों को अपने साथ मतदाता परिचय पत्र या फिर कोई अन्य पहचान पत्र का सहारा लेकर टिकट काउंटर पर अपने गंतव्य का टिकट लेना पड़ता है | रेलवे स्टेशन के आस - पास केशरिया वस्त्रों में चहल - पहल करते लोगों को देखकर रेल कर्मियों के मन में आमदनी का लड्डू फूटने लगता है और वे सीधे टिकट काउंटर की और उन्हें भेजते हैं | इन कांवरियों में अगर कोई जसीडीह से नजदीकी गंतव्य तक का हो और वो अपने गंतव्य तक का टिकट मांगते है तो फिर क्या टिकट काउंटर पर बैठे रेलकर्मियों का पैंतरा शुरू हो जाता है और वह रेलवे के वरीय अधिकारी का आदेश का हवाला देकर टिकट देने से इनकार कर देते हैं | बातें आगे बढने लगती है , तब उन्हें अपना परिचय पत्र का उपयोग करना पड़ता है | उधर प्लेटफार्म प्रवेश द्वार पर काले कोट पहन खड़े टी टी भी अपना पैतरा देने से पीछे नहीं हटता है और प्रवेश द्वार से भागने का प्रयास करता है | स्थानीय तो स्थानीय है , जब वे अड़ जाते है तो टी टी का सिट्टी - पिट्टी गम हो जाता है |
सावन माह में ३० दिनों तक रेलगाड़ी का सफर मुसीबतों का सफर साबित हो जाता है और मुसीबत इतना पेचीदा हो जाता है | श्रावणी मेला के नाम पर डयूटी करने आये रेलकर्मियों द्वारा खुलकर गुंडा गर्दी भी किया जाता है | मासिक टिकट लेकर चलने वाले यात्रियों के टिकट को फाड़ने का प्रयास किया जाता है | ऐसी घटना बीते वर्ष हो चुकी है | बैधनाथ धाम स्टेशन पर एक यात्री का मासिक टिकट टी टी ने फाड़ कर फेक दिया | वह यात्री इस मामले को लेकर स्टेशन मास्टर और अन्य पधाधिकारियों से संपर्क किया लेकिन किसी ने टिकट फाड़ने की घटना को गंभीरता से नहीं लिया , तब जाकर वह न्यायलय का शरण लिया और फिर कार्रवाई शुरू हुई | टिकट फाड़ने वाले टी टी को माफी मांगना पड़ा | वह यात्री तो एक दबंग टाइप का था तब तो ऐसा कर पाया | कमज़ोर टाइप के लोग इन गुंडा टाइप के टी टी से क्या लड़ पाएंगे | यह एक गंभीर सवाल है
सावन महिना में रेलवे का नजरिया इतना बदल जाता है यह आप सबों तक लिखकर पहुंचाना आसन नहीं है | इसे नजदीकी से जानना है तो कभी यहाँ से नजदीकी स्टेशन तक टिकट मांग कर देखिये |
Wednesday, August 3, 2011
दो अगस्त तक कुल ३० लाख ९४ हज़ार ६०४ कांवरियों ने झारखण्ड राज्य के देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल

एक माह तक चलने वाले श्रावणी मेला में दो अगस्त तक कुल ३० लाख ९४ हज़ार ६०४ कांवरियों ने झारखण्ड राज्य के देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल अर्पित कर पूजा अर्चना किया | जिसमे २० लाख ७० हज़ार ५६२ पुरुष, ०९ लाख ८० हज़ार ९२३ महिला , ३७ हज़ार ३२१ डाक कांवरिये तथा ०५ हज़ार ७९८ वी आइ पी श्रदालु शामिल है | जबकि एक अगस्त तक शीघ्र दर्शनं से ३० हज़ार ५९६ शिव भक्तों ने पूजा अर्चना किया | जिससे एक करोड़ ५२ लाख ९८ हज़ार कि आय हुयी | इस दौरान एक करोड़ ४६ लाख १२ हज़ार ४५७ रूपये नगद चदवा प्राप्त हुआ | दो अगस्त तक वाणिज्य कर - विभाग द्वारा दो लाख ९२ हज़ार खोवा से बटोर टैक्स वसूली कि गयी | नगर निगम के खाते पड़ाव शुल्क से ४४ लाख ३५ हज़ार ३८ रूपये एनी श्रोत से २८ हज़ार ९०६ रुपया यानि कुल ४४ लाख ६३ हज़ार ९४४ रुपया कि आय हुयी | लोजिंग हाउस कमिटी द्वारा सात लाख ४१ हज़ार ५४९ रूपये कि वसूली कि गए | विधुत विभाग द्वारा १५ लाख ५० हज़ार ९१३ रूपये राजस्व की वसूली की गयी | वाही दूसरी और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा २० सूचना केन्द्रों के माध्यम से ३१ हज़ार ५८६ विचादे व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाया गया | बाज़ार समिति द्वारा nirdharit lakshay २९० लाख के विरुद्ध एक अगस्त तक ८६ लाख ५१ हज़ार ९९५ रूपये कुल वसूली की गए | इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वार ७३ हज़ार ३३९ कांवरियों की चिकित्सा की गए | जिसमे ४९ हज़ार ६४९ पुरुष २० हज़ार ७१७ महिला एवं ०२ हज़ार ९७३ बच्चा शामिल है | दो अगस्त तक १३ चोरियां , ६९ गिरफ्तारियां हुयी है | धारा २९० भा द वी के तहत ०६ , धारा १०९ द प्र स के तहत दो काररवाईयां की गयी है | इस दौरान १५ लाख १७ हज़ार रूपये की माल की चोरी हुयी , जबकि एक बोलेरो , एक मोबाइल , चार छाता, बम बनाने का बारूद और करीब दो हज़ार रुपया बरामद किया गया | १४ लोगों की अप्राकृतिक मौत हुयी , दो लोगों की दुर्घटना में मौत हुयी | १४७ वाहन जब्त किये गए | ५६ हज़ार ५०० रूपये वाहनों से वसूल किये गए | यह जानकारी जिला प्रशासन के उपयुक्त मस्त राम मीणा द्वारा सार्वजानिक किया गया है |
इसके अलावे देवघर में चल रहे माह व्यापी श्रावणी मेला में देवघर जिला प्रशासन कितना धन राशि अप्राकृतिक रूप से गटक गया है | इसकी जानकारी किसी को भी नहीं मिल सकता है क्योंकि देवघर के नाम पर हरेक साल करोडो रूपये आवंटित किया जाता है , जो शिवभक्तों के असाधारण मेला को निर्बाध गति से समाप्त करने में उपयोग किया जाता है | रही बात मेला के दौरान करोडो रूपये की आय का , इस आय में भी परदे की आड़ में जिला प्रशासन कितने का घोटाला करता है , इस बात की जानकारी आमजनों को नहीं हो पाती है | आमजन केवल अपने मुख से घोटाला होने की चर्चा करतें है | अगर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँगा जाय एक बड़े घोटाला का पर्दाफास होगा और इसमें शामिल कई लोगों के चेहरें बेनकाब होंगें | हो सकता है , इस प्रकरण में कुछेक को अपने जान की क़ुरबानी देनी होगी | यह एक कठिन विषय है , इस पर लोगों को जागरूक होना होगा | तभी यह संभव है , अन्यथा मेला के नाम पर आवंटित धनराशि का बंदरबांट पदाधिकारी और सफेदपोश काफी महफूज हो करतें रहेंगे और महीने भर के मेला के नाम पर प्राप्त आय का वेमन से लेखा - जोखा प्रस्तुत करतें रहेंगे | झारखण्ड राज्य के देवघर जिला को बाबा बैधनाथ के नाम पर केवल सावन माह में होने वाले करोडो रूपये के होने वाले आय के अलावे बाबा बैधनाथ मंदिर में अपनी हिस्सेदारी का दावा करने वाले संघठन पंडा धर्म रक्षिणी सभा की आय भी करोडो रूपये की होती है | लेकिन पंडा धर्म रक्षिणी सभा की आय को कभी सार्वजानिक नहीं किया जाता है | यह कहा जाता है कि यह आय एक स्वयं सेवी संघठन का है , जो पंजीकृत है | इस संघठन के आय का खुलासा नहीं होने के कारण हमेशा पंडा समुदाय के बीच असंतोष का लहर पैदा होता है | दबे जुबान विरोध करतें है , लेकिन इस बार एक दबंग किस्म के व्यक्ति ने अव्यवहारिक रूप से अपना विरोध जताया , जिस कारण संघठन का मुखिया व अन्य पधाधिकारी ने अपना इस्तीफा दे दिया | लोगों के बीच यह बात फैल गयी , लोगों ने तरह - तरह टिप्पणी करना शुरू कर दिया | लोक लाज के भय से एक कथित दबंग व्यक्ति ने इस्तीफा वापस लेने का दवाब बनाया और अंततः संघठन के लोगों ने इस्तीफा वापस कर लिया | इस तरह इस संघठन का हाई भोल्टेज ड्रामा ख़त्म हो गया | अब सवाल उठता है कि जिला प्रशासन की तरह अपनी आय का खुलासा यह संघठन करेगी ? अगर कर दिया तो केवल शावन माह में बाबा बैधनाथ अरबों रूपये आय देने वाला बाबा कहलायेगा और देश के अन्य मंदिरों / धार्मिक संघठनों के श्रेणी में सबसे आगे होगा |
Saturday, January 1, 2011
देवनगरी देवघर
देवनगरी देवघर एक और जहाँ अपने धार्मिक व् अध्यात्मिक महत्वों से प्रसिद्द हैं , वहीँ दूसरी ओर नव वर्ष के अवसर पर यह अपने आप में एक चर्चित स्थान बन जाता है | शहर तो क्या आसपास के गांवों में भी नव वर्ष मनाने का उत्साह परवान पर होता है | इसका नज़ारा ....
Wednesday, July 21, 2010
बाबा मंदिर में संदेह के आधार पर पकडाया गया व्यक्ति क्या एक आतंकी है ?
श्रावणी मेला की उलटी गिनती शुरू होते ही देवनगरी देवघर में तरह - तरह का अफवाह उत्पन्न होने लगा है | जिसमे आतंकी हमला तो काफी नक्सली हमला मुख्य रूप से मुखरित होता है | इसी क्रम में आज २३ जुलाई को यहाँ के चर्चित और प्रसिद्ध बाबा - बैधनाथ मंदिर में संदेह के आधार पर एक व्यक्ति को पकड़ा गया है , आशंका जताया जा रहा है कि यह व्यक्ति आतंकी है और मंदिर में अपने काले करतूत को अंजाम देने आये थे | सबसे रोचक बात है कि संदेह के आधार पर पकडे गए व्यक्ति ने बाबा मंदिर में विधि- विधान अनुरूप पूजा अर्चना किया और मंदिर से पूजा कर मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही पुलिस ने उसे संदेह के आधार पर अपने गिरफ्त में ले लिया | पुलिस द्वारा संदेह जताने का कारण केवल तो बस इतना था कि , उनके चेहरे पर लम्बी दाढ़ी थी और पौशाक में पंजाबी कुर्ता पहना था , सर के बाल मुड़े हुए थे | इस रंग -रूप को देख पहले पुलिस अचंभित हुई और फिर उसे पूछताछ के लिए अपने कब्जे में ले लिया | जाँच के क्रम में उनके पास से एक डायरी मिला , जिसमे ख़रीदे गया पंजाबी - पायजामे का रसीद और उसके द्वारा लिखे गए कुछ शब्द थें | पुलिस के कब्जे में लेने का बाद ही पूरे शहर में यह खबर आग की तरह फैल गयी कि एक आतंकी पकड़ा गया , | बतातें चलें की देवघर स्थित बाबा मंदिर में हिन्दुओं के अलावे मुस्लिम भी पूजा अर्चना करतें है | श्रावणी मेला में कई कई मुस्लिम कांवर यात्रा कर सुल्तानगंज से गंगा जल लाकर बाबा के शिवलिंग पर अर्पण करतें हैं | साल भर किसी न किसी बहाने मुस्लिम वर्ग भी अपनी आस्था प्रकट करने आतें रहतें हैं | ऐसे में एक मुस्लिम लिबास में कोई व्यक्ति बाबा मंदिर में पूजा करता है तो वर्तमान समय में आतंकी करार दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है | उधर पुलिस इसे आतंकी करार देने के लिए कवायद में लगें हैं , वहीँ दूसरी तरफ इस व्यक्ति को टीका - चन्दन लगाकर पूजा - अर्चना करवने वाले पुरोहित को भी पुलिस पूछताछ के लिए अपने कब्जे में ले रखा है | पुरोहितों ने भगवान् के घर में सब सामान है कहकर इसे भी बाबा का भक्त कहने से भी पीछे नहीं हट रहें हैं , जबकि संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए उक्त व्यक्ति के पास से बरामद डायरी में उनका घर का पता लहर्दंगा , नवाडीह, जिला बोकारो लिखा रहने के कारण पुलिस असमंजस की स्थिति में है | पुलिस उनके पास से बरामद बैग और डायरी और डायरी में लिखे शब्द को लेकर गंभीर बना हुआ है , कि सचमुच में यह व्यक्ति आतंकी का एक कारिन्दा तो नहीं है |
बाबा मंदिर में संदेह के आधार पर पकडाया गया व्यक्ति क्या एक आतंकी है ?
बाबा मंदिर में संदेह के आधार पर पकडाया गया व्यक्ति क्या एक आतंकी है ?
Saturday, July 17, 2010
"बोल बम "
आगामी २६ जुलाई से सावन मास शुरू होने जा रहा है , इस एक महीने में पूरा देवघर आस्था का महासंगम बन जायेगा , चारो और बस एक ही नारा सुनने को मिलेगा "बोल बम " | वर्ष के इस एक महीने में जितना आस्था केवल देवघर (झारखण्ड ) में दिखता है उतना ही यहाँ से करीब १०८ किलोमीटर दूर स्थित सुल्तानगंज (बिहार) में भी दिखता है | आस्था से लबरेज लोंगों की आत्मविश्वास की एक झलक पैदल कांवर यात्रा में भी दिखता है | लोंगों के दिलो - दिमाग में बस एक ही बात घर कर जाती है की बाबा बैधनाथ को जलार्पण करना है | क्योंकि बाबा मनोकामना शिवलिंग है और तो और यह द्वादश ज्योतिर्लिंग में भी एक अहम् स्थान रखता है | हालाँकि देवघर स्थित बाबा बैधनाथ मंदिर में विभिन्न देवी - देवताओं के कुल २२ मंदिर हैं , लेकिन उन सबों में सबसे ज्यादा आस्था बाबा बैधनाथ के प्रति ही देखा जाता है | भक्त बाबा पर जलार्पण करने के लिए लम्बी कतार के साथ कई परेशानिओं का सामना करने के बाद भी गर्भगृह में प्रवेश कर सुल्तानगंज से लाकर गंगा जल अर्पण करतें हैं | समय के साथ भक्तों के सेवा के लिए कई सामाजिक संघठन भी अपना - अपना शिविर लगाकर भक्तों के सेवा के माध्यम के से पुन्य बटोरने का प्रयास करतें हैं | सुल्तानगंज से देवघर तक रास्तों में कई स्वयं सेवी संस्थाओं और सामाजिक संघठनों के शिविर के अलावे कई नामचीन कोर्पोरेट कम्पनियाँ भी अपना - अपना शिविर लगातें हैं और बी टू बी के माध्यम से अपना विपणन का रास्ता तैयार करतें हैं |
वहीँ बाबा के भक्तों के काँधे पर कांवर का दृश्य भी अद्भुत होता है | बच्चे हो या बड़े , महिला हो या पुरुष , सभी के काँधे पर कांवर नज़र आता है | कांवर भक्त अपने क्षमता के अनुसार विभिन्न आकर - प्रकार और विभिन्न वजनों में कांवर लेकर बाबा नगरी आतें हैं | इसके अलावे कई भक्त सांप तो कई भक्त बाबा के विभिन्न प्रकार के प्रिय दूत को लेकर बाबा मंदिर अपनी आस्था व्यक्त करने आतें हैं | वर्ष के बस एक महीने में यानि सावन महीने में मानव का एक महासमुद्र देवघर में उतर आता है , पूरा शहर भगवा धारी भक्तों से पट जाता है | शहर का सारा कोना बोलबम से गूंजामयान हो जाता है | इस एक महीने में बिहार प्रान्त का सुल्तानगंज और झारखण्ड प्रान्त का देवघर ( बैधनाथधाम) और बासुकीनाथधाम आस्था का संगम बन जाता है |देवघर आने के पहले भक्त बिहार के सुल्तानगंज स्थित गंगा में स्नान कर पवित्र हो गंगा जल उठातें हैं और फिर पवित्रता के साथ देवघर के लिए रवाना हो जातें हैं | देवघर में बाबा बैधनाथ के शिवलिंग में जलार्पण करने के बाद यहाँ से करीब २० किलोमीटर दूर स्थित बासुकीनाथ धाम जातें है और अपनी नाना प्रकार की महत्वाकांक्षा की कामना करतें है |
वहीँ बाबा के भक्तों के काँधे पर कांवर का दृश्य भी अद्भुत होता है | बच्चे हो या बड़े , महिला हो या पुरुष , सभी के काँधे पर कांवर नज़र आता है | कांवर भक्त अपने क्षमता के अनुसार विभिन्न आकर - प्रकार और विभिन्न वजनों में कांवर लेकर बाबा नगरी आतें हैं | इसके अलावे कई भक्त सांप तो कई भक्त बाबा के विभिन्न प्रकार के प्रिय दूत को लेकर बाबा मंदिर अपनी आस्था व्यक्त करने आतें हैं | वर्ष के बस एक महीने में यानि सावन महीने में मानव का एक महासमुद्र देवघर में उतर आता है , पूरा शहर भगवा धारी भक्तों से पट जाता है | शहर का सारा कोना बोलबम से गूंजामयान हो जाता है | इस एक महीने में बिहार प्रान्त का सुल्तानगंज और झारखण्ड प्रान्त का देवघर ( बैधनाथधाम) और बासुकीनाथधाम आस्था का संगम बन जाता है |देवघर आने के पहले भक्त बिहार के सुल्तानगंज स्थित गंगा में स्नान कर पवित्र हो गंगा जल उठातें हैं और फिर पवित्रता के साथ देवघर के लिए रवाना हो जातें हैं | देवघर में बाबा बैधनाथ के शिवलिंग में जलार्पण करने के बाद यहाँ से करीब २० किलोमीटर दूर स्थित बासुकीनाथ धाम जातें है और अपनी नाना प्रकार की महत्वाकांक्षा की कामना करतें है |
Tuesday, March 9, 2010
Saturday, March 6, 2010
माँ ललिता हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेण्टर द्वारा वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित दो दिवसीय 'स्वास्थ्य मेला' में
झारखण्ड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर में एक निजी अस्पताल माँ ललिता हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेण्टर द्वारा वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित दो दिवसीय 'स्वास्थ्य मेला' में एक और जहाँ मुफ्त चिकित्सा लाभ आम लोगों को दिया गया और साथ - साथ किसी भी प्रकार की तकनिकी जांच पर २० से ४० प्रतिशत की विशेष छूट दिया गया | वहीँ दूसरी और यह बताने का प्रयास किया गया कि यह अस्पताल किसी भी प्रकार के संवेदित रोग और संवेदित दुर्घटना में उचित चिकित्सा लाभ देने में सक्षम है | हालाँकि उक्त अस्पताल में करीब २५ स्पेस्लिस्ट डॉक्टर हैं और २०० बेड से लैस मल्टी सुपर स्पेसिलिटी सुविधा है | ऐसे में इस अस्पताल के एक वर्ष पूरा होने पर मुफ्त चिकित्सा हेतु आयोजित स्वास्थ्य मेला इस क्षेत्र के लोगों के बीच अस्पताल के गुणवता के साथ - साथ वेहतर चिकित्सा सेवा का एक सन्देश देने का काम किया | बतातें चलें कि इस अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएँ अब संताल परगना क्षेत्र के लोगों को किसी भी प्रकार के जानलेवा बीमारी और अकस्मात घटी मार्मिक घटनाओं से विचलित हो जानेवाली स्थिति से लगभग विराम लगने वाला है और करीब - करीब विराम लग चुका है | पहले तो किसी भी के बीमारी के लिए पटना या फिर किसी अन्य चर्चित शहर के डॉक्टरों के पास जाना पड़ता था , किन्तु इस अस्पताल के खुल जाने से अब यहाँ के लोगों को इसका लाभ मिल रहा है | यह अस्पताल आई एस ओं प्रमाणित है और सरकारी स्तर पर भी एक आई एस ओं प्रमाणित अस्पताल है किन्तु सरकारी अस्पताल केवल तो केवल आई एस ओं प्रमाणित का लेवल लगा रखा है और यहाँ सेवा दे रहे डॉक्टर सेवा देने के बदले मरीजों से झुंझलाहट और गुस्से से ही स्वागत करतें हैं | दूसरी और तो नाम के आगे मरीजों को आई एस ओं स्तर का इलाज़ भी नहीं दे पातें हैं | अब देवघर की धरती पर दो - दो आई एस ओं प्रमाणित अस्पताल हैं , इसमें से कौन आम लोगों के बीमारी से निजात दिलाने के लिए कारगार साबित होगा और आर्थिक और मानसिक रूप से उन्हें संतुष्टि दिलाने में वरदान साबित होगा | यह आनेवाला भविष्य ही बतायेगा |
Tuesday, February 16, 2010
सत्ता सुख का मजा मधु कोड़ा प्रकरण
भारत आज़ाद हुए वर्षों हो गयी है , और भारत देश के भिन्न रायों में विभिन्न राजनितिक दलों ने सत्ता सुख का मजा चख लिया है लेकिन मधु कोड़ा ने जिस तरह से एक मिसाल किया है , वह एक इतिहास ही है करीब तीन वर्षों में झारखण्ड के सत्ता पर बैठ कर जनता के धन के राजकीय कोष से जिस प्रकार का घोटाला दिखाया है वह शायद वर्षों पूर्व के मुख्यमंत्रियों ने भी किया होगा जो अब तक परदे के अन्दर है लेकिन झारखण्ड के निर्दलीय मुख्यमंत्री मधु कोड़ा द्वारा मात्र तीन वर्षों में अर्जित की गयी संपत्ति सभी राजनितिक दलों के लिए किरकिरा हो गया , जिसमे सबसे आगे कांग्रेस ही है क्योंकि कांग्रेस ने ही अपने लक्ष्य के अनुसार मधु कोड़ा को झारखण्ड राज्य के सत्ता पर बिठाने के लिए समर्थन दिया था , लेकिन ठीक उसके विपरीत हुआ , कांग्रेस को चोरी/ लूट के माल में हिस्सेदारी नहीं मिला और कांग्रेस का लूटने का सपना टूट गया अब कांग्रेस विभिन्न प्रकार की जाँच बिठाकर अपने को पाक-साफ साबित करने के लिए एडी - छोटी एक किये हुए हैं मामला कुछ भी हो , इसके बाद के कार्यकाल में राज्यपाल सिब्त्ते राजी का कार्यकाल भी विवादों से भरा हुआ है राज्यपाल महोदय ने भी जम कर राजकीय कोष को तरीके से लूटने का काम किया और अपने राज्य चले गए बात यही नहीं समाप्त होती है , बल्कि और विकराल रूप लेती जा रही है एक राज्यपाल को चोरी के दाग से बचाने के लिए और अपने को बेदाग़ साबित करने के लिए कांग्रेस ने जिस तरह का पासा फेंकना शुरू किया है , वह यह बताने का प्रयाश कर रहा है की कांग्रेस को चोर मत कहो कांग्रेस देशहित में काम करता है वहीँ दूसरी और मधु कोड़ा प्रकरण इस बात को काफी गौरव से कहता है कि मात्र तीन साल में जिस कदर राजकीय कोष का उपयोग स्वहित में कर सकता हूँ , ठीक इसी प्रकार अन्य राजनितिक दलों ने भी मुख्यमंत्री रहते हुए राजकीय कोष को जमकर लूटा है और राज्यों को विकाश के किरण से कोसों दूर रखा है मधु कोड़ा प्रकरण में यह भी दम है कि , आजतक कांग्रेस अपने को सबसे होशियार राजनितिक दल और हिंदी भाषी राज्यों के लोंगों को मुर्ख समझते थे , और किसी भी हिंदी भाषी को मोहरा बनाकर कहें भी उपयोग कर लेते थे , जो अब नहीं चलेगा अब नहीं चलेगा . राजनेताओं कि झूठी आश्वाशन सत्ता सुख लेने वाले हरेक राजनितिक दल के मुखिया जनता के राजकीय और राष्ट्रिय कोष से इसी प्रकार से धन राशि को अपने नाम करतें हैं , उनपर क्यों नहीं जाँच होती हैं यह सवाल का विषय है करीब तीन साल में करोड़ों की संपत्ति अर्जित करनेवाले मधु कोड़ा ने हिंदी भाषी राज्यों से नफरत करने वाले नेताओं को यह सन्देश देने का काम किया है कि हिंदी भाषी में इतना प्रतिभा है , जिसका उपयोग अन्य राज्यों के लोग करतें हैं प्रतिभाओं के बल पर किसी राज्य को एक नया रूप दे देते हैं तीन साल में करोडो कि राशि --------------------------और करीब २०-३० सालों तक सत्ता सुख लेने वाले मुख्यमंत्रियों ने भी करोडो का राशि हड़प लिया है उनके करीबी का भी जाँच करना चाहिए आजादी के बाद से सत्ता सुख प्राप्त करने वाले सभी मुख्मंत्रियों का भी संपत्ति का जाँच होना चाहिए
Tuesday, February 9, 2010
सिमुलतला में वर्षों बाद विकास की किरण

देवनगरी देवघर से करीब ३० किलोमीटर दूर स्थित प्रकृति के गोद में बसे सिमुलतला में वर्षों बाद विकास की किरण प्रस्फुटित होने जा रही है, जिसके रश्मि से केवल यह क्षेत्र ही नहीं पूरा बिहार दीप्तमान होगी इस अनोखे अध्याय के शुरुआत में समाज के बुद्धिजीवियों के अलावे तत्कालीन सांसद गिरधारी यादव और समाज के चेहते व्यक्ति अजित का (अजित सिंह ) का अभूतपूर्व योगदान रहा है इसके बाद सिमुलतला के नाम से विद्यालय की स्थापना के विषय पर वर्तमान बिहार सरकार के कथित मंत्री की भूमिका भी सराहनीय रही है , जिन्होंने अपने दूरदर्शिता का परिचय दिलाते हुए कैबिनेट में काफी गरमा -गर्मी माहोल उत्पन्न कर सिमुलतला आवासीय विद्यालय ,सिमुलतला पर मोहर लगाने को विवश किया विकास की पहली किरण के लिए लालायित सिमुलतला को इसी मिटटी के सुगंध में पले बड़े तत्कालीन सांसद गिरधारी यादव ने राजधर्म का पालन करते हुए विकास के मामले में पीछे चल रहे सिमुलतला को विकास की किरण से जोड़ने के लिए समाज के चेहते व् चर्चित व्यक्ति अजित का का नेत्रित्व लेकर कांग्रेसी नेता बबली सिंह ( अशोक सिंह) के साथ समाज के बुद्धिजीवियों को विकास का पाठ पढाया और काफी मसक्कत के बाद विद्यालय हेतु करीब २०० एकड़ bhumi uplabhd karaya अब बिहार सरकार विकास की किरण से कोसों दूर इस क्षेत्र को विकास के गति का पहिया पहनाने को हर संभव प्रयास कर अमलीजामा पहनाने को संकल्पित हो चुके हैं। ज्ञात हो यह क्षेत्र केवल दूरदर्शिता के अभाव में इतिहास के पन्नो तक ही सिमटा था और हकीकत यह है कि, सिमुलतला आज़ादी के पूर्व ब्रिटिश हुकूमत का उपनिवेश था , आजादी के बाद भी यह भारत देश के नौकरशाहों और शासकों का उपनिवेश बना हुआ है यह घोषित है , क्योंकि राज्य सरकार के द्वारा जो भी विकास के कार्य किये जातें थे वह दुराग्रह से प्रभावित राजनेताओं और नौकरशाह के इशारे पर गटक लिया जाता था विकास के पायदान पर चड़ने के पहले इस क्षेत्र को पहाड़ और पत्थरों तथा जंगलों वाले क्षेत्र के नाम से दरकिनार कर दिया जाता था परिणामस्वरूप वक्त के रफ्तार के साथ शायद श्रृष्टि के रचयिता को कुछ और ही मंजूर हुआ और भारतीय जनजागरण के प्रथम पडाव के रूप में शिक्षा का दीप जलाने को प्रोत्साहित कर दिया , इस क्षेत्र को सिमुलतला आवासीय विद्यालय ,(स्वयं के नाम से ) एक राष्ट्रीय स्तर के विद्यालय का तोहफा दे डाला यह विद्यालय सिमुलतला को पुनः राष्ट्रिय स्तर पर एक नयी पहचान देने जा रही है ज्ञात हो कि सिमुलतला बाबा बैधनाथ की नगरी देवघर से करीब ३० किलोमीटर दूर स्थित है यह झारखण्ड राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र पर बिहार राज्य के जमुई जिला के तहत झाझा प्रखंड के अंतर्गत है पर्यटन के मानचित्र पर सिमुलतला एक पर्यटक स्थान के नाम से प्रसिद्द है और अब भी यह गाँधी जी के प्रिय महिला सहकर्मी तूफानी के बचपन के आँगन के नाम से जाना जाता है , स्वामी विवेकानंद ,ब्रहमानंद,और महाकवि रविंद्रनाथ के अलावे आजादी के कई दीवानों के प्रथम कर्मक्षेत्र के नाम से इतिहास में रेखांकित है, सिमुलतला आवासीय विद्यालय में नेतरहाट के तर्ज पर सह शिक्षा प्रणाली के अनुसार शिक्षा दिए जाने की योजना है इसके अलावे भविष्य में इस विद्यालय में आधुनिक तकनीक के माध्यम से कई प्रकार के विशेष शिक्षा देने की योजना है , और अब दुर्भाग्य यह है की बिहार सरकार द्वारा उक्त विद्यालय के नाम पर बनाये गए वेबसाइट भी उचित ढंग से पूरी नहीं की गयी है बनाये गए वेबसाइट आधे - अधूरे हैं , जिससे उक्त विद्यालय से सम्बंधित जानकारी भी आम अवाम तक नहीं पहुँच पा रहा है इस सम्बन्ध में भारत सरकार के शिक्षा विभाग को विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि विकास की किरण को पहुचाने को तत्पर शिक्षा विभाग की जानकारी जिज्ञाशु व्यक्ति तक आसानी से पहुँच सके जानकारी के लिए.......
Monday, February 8, 2010
महाशिवरात्रि महोत्सव
देवनगरी देवघर में महाशिवरात्रि महोत्सव की धूम मची है इस पावन अवसर पर पुरे देवधरा को देवघर की धरती पर उतारने के लिए आयोजक जोर शोर से लगें है जैसा की बता दें , देवघर बाबा बैधनाथ के कामनालिंग के रूप में प्रसिद्ध होने के कारण भगवान् शिव से सम्बंधित सभी प्रकार के उत्सव समारोह पूर्वक मनाये जातें हैं महाशिवरात्रि तो बाबा बैधनाथ की विवाह की बारात की उत्सव होती है इस दिन भक्त बाबा बैधनाथ के विवाह के पृष्ठभूमि के अनोखे कहानियों को विशेष रूप से याद करतें हैं वर्ष २००९ में तो विशेष आकर्षण सिरकटा दैत्य है इस झांकी को देखने के लिए देश के विभिन्न भागों से भक्तों का जमावड़ा लग जाता है
Thursday, June 4, 2009
विधुत्त विभाग का एक सनसनी खुलासा ........


एक और जहाँ देवघर जिले को विश्वव्यापी श्रावणी मेला के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष पैकेज दिया जाता है वहीँ दूसरी और इस पैकेज का एक दूसरा रूप भी देखा जाता है जो पूरे मेला में तो स्पष्ट रूप से नज़र आता है लेकिन सही मायने में यह अंकेक्षण विभाग के खाते में पूर्ण रूप से परिपक्व नज़र नहीं आता है जिसका एक रूप देवघर स्थित विभिन्न विभागों के ख़ाक छानने से स्पष्ट होता है प्रशासन जैसे-तैसे मेले को संपन्न कराकर सफलता की शेखी बघारते है लेकिन उन शेखी के राहों में कितनी सच्चाई धरातल है , यह अनुत्तर ही रह जाता है इस सन्दर्भ में यह विषय भी काफी रोचक है कि करोडो रूपये आवंटन होने के वावजूद भी विधुत्त विभाग के खाते में करीब ५३ लाख रूपये बकाये के रूप में है विधुत्त बोर्ड जिला प्रशासन से इस सन्दर्भ में भुगतान करने की गुहार लगाई है रोचक बात यह है कि यह बकाया एक साल का नहीं है बल्कि सात साल का है इस बकाया रकम के भुगतान नहीं होने कि हालत में इस साल विधुत्त विभाग के इ एस इ बी के सिन्हा ने लिखित रूप से मेला में विधुत्त उपलब्ध कराने के लिए बत्तोर आठ लाख अग्रिम जमा मांगी है उन्होंने अपने पत्र में राज्य सरकार के ऊर्जा सचिव के देवघर आगमन पर १३ मई को परिसदन में हुई चर्चा का हवाला देते हुए उक्त भुगतान की मांग की है अब जरा सोंचे देवघर के मासव्यापी श्रावणी मेला के लिए राज्य सरकार द्वारा आवंटित पैकेज के वावजूद भी मेला के दौरान सेवा उपलब्ध करा रही विभिन्न विभागों का रुपया बकाया रह जाता है तो मेला के नाम पर पदाधिकारी किस कदर आवंटित धनराशि का उपयोग करते होंगे यह भी एक प्रश्न का विषय है जो पूरे मेला व्यवस्था के साथ - साथ मेला का कमान संभाल रहें पधाधिकारियों के साथ सम्बन्ध रखता है जानकारी के अनुसार वर्ष २००२ से लेकर वर्ष २००८ तक श्रावणी मेले में अस्थायी कनेक्शन के मद में जिला प्रशासन पर ५२ लाख ५७ हज़ार ८५९ रुपया ४८ पैसा बकाया है वर्ष २००२ में ०२ लाख ८७ हज़ार ७९६ रुपया ,
वर्ष २००३ में ०६ लाख १३ हज़ार ७५९ रुपया,
वर्ष २००५ में ०९ लाख ९० हज़ार ३० रुपया,
वर्ष २००७ में ०७ लाख ९५ हज़ार ६५४ रुपया,
वर्ष २००८ में ०७ लाख १५ हज़ार ७५३ रुपया ४८ पैसा
करोडो रूपये का पैकेज लेने वाले देवघर प्रशासन महज बिजली उपभोग का बकाया रखती है तो न जाने किस - किस विभाग और बाहर से भाड़े पर लाये गए या ली गयी सेवाएं का भी बकाया रखतें होंगें यह बानगी कहता है विधुत्त विभाग का एक सनसनी खुलासा
Monday, April 13, 2009
दिल से नजदीकी का अहसास कराती मांस
प्रस्तुत कथा संग्रह के अनुसार समाज के उन सभी संसाधनों को मुखरित करने का प्रयास किया गया है , जो आज भी किसी न किसी कारणवश विकाश के रौशनी से अब भी कोसों दूर है उक्त कथा संग्रह के द्वारा संथालपरगना के समस्त मूल्य चेतनाओं को परत दर परत बदलाव की और ले जाया गया है मूल्यहीन के इस दौर में मुख्य स्वार्थी और आत्मकेंद्रित हो रही शाषण और प्रशासन के अन्दर कुंठित हो गयी मानवता को उजागर किया गया है जो आज भी शाश्वत है हाँ उनके माननेवाले बदल गएँ है बदलाव मनुष्य की सोंच में आया है मूल्य चेतना कम हुई है हम आदमियत खोते जा रहे हैं बात विश्वास व विश्वग्राम की करतें हैं , पर पडोसी तक को नहीं जानते हैं , और उन्हें पूछ्तें तक नहीं हैं स्वार्थी होने पर मनुष्य की संवेदना समाप्त हो जाती है उसमे नैतिक साहस नहीं रहता है ऐसे में वह किसी की भी सहायता नहीं कर सकने लायक रहता है माना की बहुत कुछ बदला है , लेकिन सब कुछ समाप्त नहीं हुआ है यहाँ इस धरती पर , ऐसे लोग भी है जिनकी मानवीय एक नैतिक मूल्यों में गहरी आस्था है यकीन कीजिये आज भी दुष्टों एक बेईमान की तुलना में भले लोंगों की संख्या अधिक है , तभी तो यह दुनिया चल रही है विश्वास बना हुआ है अपने कथन के समर्थन में कुछ सत्य घटनाओं का उल्लेख करना चाहता हूँ मांस और सिम्मी के अलावे राजमहल की......................इस काव्यसंग्रह में कई बातों का उल्लेख किया गया है , जो अध्ययन के दौरान दिल को छु जाती है
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